Navratri Katha: नवरात्रि की कथा, क्यों मनाएं जाते हैं नौ दिन के नवरात्रि | Shardiya Navratri 2021: जानिए क्यों मनाई जाती है नवरात्रि? क्या है इसका महत्व

नवरात्रि के पावन पर्व की शुरुआत आज से हो गई है। हिंदू धर्म में नवरात्रि का बहुत अधिक महत्व होता है। नवरात्रि के दौरान मां के 9 रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है। नवरात्रि के दौरान भक्त मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी रखते हैं। नवरात्रि व्रत के दौरान व्रत कथा का पाठ करने का बहुत अधिक महत्व होता है। अगर आप नवरात्रि व्रत कथा का पाठ नहीं कर सकते हैं तो व्रत कथा को सुन लें। इस साल 8 नवरात्रि ही हैं। तृतीया और चतुर्थी तिथि एक ही दिन पड़ रही हैं। 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक नवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। 15 अक्टूबर को दशहरा यानी विजयदशमी का पावन पर्व मनाया जाएगा।नवरात्र के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं, पर निम्न दो कथाएं सर्वाधिक तार्किक एवं प्रचलित हैं। पहली कथा है- ब्रह्माजी ने श्रीराम से रावण का वध करने के लिए चण्डी देवी की उपासना कर उन्हें प्रसन्न करने के लिए कहा था। चण्डी पाठ एवं हवन के लिए दुर्लभ नीलकमल की भी व्यवस्था स्वयं ब्रह्माजी ने कर दी। वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरत्व के लिए चण्डी पाठ शुरू कर दिया। यह बात पवन के माध्यम से इन्द्र ने श्रीराम तक पहुंचा दी। इधर रावण ने राम की पूजा बाधित करने के लिए मायावी तरीके से पूजा-स्थल से एक नीलकमल गायब कर दिया। तभी श्रीराम को स्मरण हुआ कि उन्हें ‘नवकंजलोचन’ (कमलनयन) भी कहा जाता है।

ज्योतिषाचार्य अनीस व्यास इस कथा के बारे में बताते हैं कि श्रीराम ने अपने एक नेत्र को मां की आराधना में समर्पित करने के उद्देश्य से जैसे ही तुणीर से बाण निकाल कर अपने नेत्र में चलाना चाहा, वैसे ही मां दुर्गा ने श्रीराम के भक्ति भाव से प्रसन्न होकर उन्हें विजयश्री का आशीर्वाद प्रदान कर किया। इस प्रकार रावण का वध हुआ और तब से मां दुर्गा की उपासना का पर्व ‘नवरात्र’ मनाया जाने लगा। दूसरी कथा है- महिषासुर की उपासना से प्रसन्न होकर देवताओं ने उसे अजेय होने का वरदान दिया। महिषासुर ने इसका दुरुपयोग शुरू कर दिया। वह सूर्य, चन्द्र, इन्द्र आदि देवताओं के अधिकार छीन स्वयं स्वर्गलोक का मालिक बन बैठा। उसके भय से पीड़ित देवताओं को स्वर्गलोक छोड़ कर मत्र्यलोक में रहना पड़ा। तब महिषासुर का नाश करने के लिए देवताओं ने मां दुर्गा की रचना की। देवताओं ने मां दुर्गा को बल प्रदान करने के लिए सभी अस्त्र-शस्त्र उन्हें प्रदान कर दिए। अंत में महिषासुर का वध कर मां दुर्गा ‘महिषासुरमर्दिनी’ कहलाईं। इस प्रकार नवरात्र का त्योहार प्रारंभ हुआ।

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